सामजिक मुद्दा
जग मोहन ठाकन
बेखौफ़ होते बलात्कारी
हमारे देश में हर घंटे में चार बलात्कार हो
जाते हैं यानि प्रतिदिन ९६ . राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष २०१३
में ३३७०७ ,वर्ष २०१४ में ३६७३५ तथा वर्ष २०१५ में
३४६५१ बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे और लोकलाज तथा इज्ज़त के नाम पर दर्ज ना होने वाले बलात्कार
के मामलों को भी अगर जोड़ दिया जाए तो स्थिति और भी भयावह नजर आएगी .परन्तु ना केवल
नाबालिग रेप के भी मामले बढ़ते जा रहे हैं अपितु बलात्कारियों के होंसले इतने बुलंद
होते जा रहे हैं कि पीड़िताओं को या तो मार दिया जाता है या लोक लाज के भय एवं
परिवार की तिरछी नज़र से देर सवेर आत्महत्या करने को विवश कर दिया जाता है .
एक समाचार के अनुसार हरियाणा के कैथल की एक
१४ वर्षीय नौवीं कक्षा की स्कूली छात्रा के गैंगरेप की शिकार होने का मामला सामने आया
है .दुष्कर्म से आहत कैथल की रहने वाली इस लड़की ने महिला पुलिस थाना में शिकायत दी
है ,जिसमे उसने बताया है कि १३ सितम्बर को वह सुबह साढ़े सात
बजे स्कूल जा रही थी तभी स्कूल के सामने दो युवकों ने उसे कार के
अन्दर खींच कर अपहरण कर लिया .कुछ दूरी के बाद दो अन्य युवक भी कार में बैठ लिए
.आरोपी उसे कुरुक्षेत्र रोड पर ले गये जहाँ उन्होंने कार में ही उससे बलात्कार
किया और जान से मारने की धमकी देकर कैथल छोड़ गए . पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म तथा धमकी देने का केस दर्ज कर लिया है . इस घटना से पीडिता इतनी
भयभीत हुई कि उसने पुलिस में भी एक सप्ताह बाद शिकायत दर्ज करवाई .
एक अन्य ताज़ा सितम्बर माह का ही उदाहरण एक
स्कूल का है जहाँ हम अपने बच्चों को शिक्षित व संस्कारित करने हेतु भेजते हैं .
समाचार हरियाणा के पंचकुला जिले के पिंजौर ब्लाक के गाँव धतोगडा के सरकारी सीनियर
सेकेंडरी स्कूल का है , जहाँ की दसवीं कक्षा की पांच
छात्राओं ने अपने ही स्कूल के एक अध्यापक पर अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है
.आरोप के मुताबिक यह अध्यापक गत छह माह से ऐसी गलत हरकतें कर रहा था और लड़कियों को
इसके बारे घर पर बताने पर वह धमकी भी देता था . खैर देर सवेर अध्यापक की करतूत
सामने आ गयी और लड़कियाँ बलात्कार की शिकार होने से बच गयी .
अगस्त ,२०१७ में
घटित एक बलात्कार के मामले में हरियाणा के
जींद जिला के उचाना थाना क्षेत्र के अधीन बलात्कारियों ने तो सभी हदें पार कर दी
.प्राप्त जानकारी के अनुसार पीडिता के ही गाँव के ही तीन नवयुवकों ने अगस्त माह
में एक दलित परिवार की लड़की को कुए पर पानी लेने जाते समय अगुआ
कर बलात्कार किया और फिर गाँव के बाहर लड़की को छोड़ कर चले गए . लड़की के पिता के अनुसार लड़की ने सारी घटना से परिवार को उसी समय अवगत करवा दिया
था परन्तु लोकलाज के भय से परिवार वालों ने कोई केस दर्ज नहीं करवाया . करीब एक
माह बाद बलात्कारियों ने रविवार ,१७ सितम्बर को लड़की के घर
की खिड़की पर एक पत्र चिपका दिया जिस पर उसे दोबारा घर से बाहर आकर बलात्कारियों से
मिलने की धमकी दी गयी थी .
सामाजिक प्रतिष्ठा के भय तथा रेपिस्ट की दोबारा बलात्कार
करने की धमकी भरा पत्र पीड़िता के घर पर इश्तिहार के रूप में चिपकाने की घटना ने
पीडिता को जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने को विवश कर दिया और उसने जहर
खाकर अपना जीवन समाप्त करना बेहतर समझा तथा दूसरे दिन हॉस्पिटल में उसकी मौत हो
गयी . पुलिस के अनुसार पुलिस केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया
है .
आरोपियों पर केस भी दर्ज हो गया है , गिरफ्तार भी हो गए हैं , कोर्ट केस भी चलेगा और
संभावित है कि कड़ी सजा भी हो जायेगी ,परन्तु आखिर क्यों
बलात्कारियों के हौंसले इतने बुलंद हुए कि एक बार बलात्कार के बाद दोबारा बलात्कार
करने हेतु लड़की के घर के आगे इश्तिहार चिपका दिया गया ? क्यों
उन्हें समाज या कानून या पुलिस का भय नहीं लगा ? वे कैसे
इतने बेख़ौफ़ हो गए ?
क्या सोचता है जन सामान्य ? इस लेखक द्वारा इस विषय में की गयी एक राय शुमारी में लोगों का आक्रोश व
हताशा झलक कर सामने आई है . १९८० के दशक के छात्र नेता रहे जगदीश चौधरी का मानना
है कि सामाजिक लोक लाज का भय और कानून का सही काम ना करना इन जैसे लोगों को इतना
बेख़ौफ़ बना देता है . एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक से जुड़े एक हिमाचली पत्रकार संजीव
ठाकुर कहते हैं कि लोकलाज के लिए कुछ परिवार इसका विरोध नहीं करते , इससे अपराधियों की ताकत और बढती है . अगर किसी के साथ भी गलत होता है तो
उसका पूर्ण विरोध करें ,ना कि उसे छुपायें . एक मिसाल बनें
तथा औरों के लिए आदर्श का काम करें .अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य
में कोई ऐसा काम ना करे .
हरियाणा के एक बैंक अधिकारी सज्जन गौतम का
विचार है कि सोशल मीडिया पर घटिया सामग्री समाज में वासना और विलासिता को बढ़ावा दे
रही है . समाज में इस प्रकार के अत्याचार पर अंकुश की आवश्यकता है .निरंतर इस
प्रकार की घटनाएं सुनने को मिल रही हैं .इन्हें रोकना होगा . मिलेनियम स्कूल की
घटना तथा इस प्रकार की अन्य घटनाओं पर निश्चित रूप से मंथन होना चाहिए .
दिल्ली निवासी हिंदी साहित्यकार आदित्या
श्योकंद के स्वर में थोड़ी हताशा झलकती है . वो कहती हैं , क्या टिप्पणी देंगें सर ? हम टिप्पणी देते रहेंगें और गंदे लोग अपराध करते रहेंगे . अपराधियों को
कठोर सजा मिलनी चाहिए , जब तक ऐसे मामलों में सख्त कदम
नहीं उठाएंगे ,ये अपराध बंद नहीं होंगें . हरियाणा शिक्षा
विभाग में कार्यरत शिक्षक विकास उज्जवल इन्साफ को ही संदेह की दृष्टि से देखते हैं
.कहते हैं इन्साफ होता है , यह भरोसा खत्म होता जा रहा है .
आखिर क्यों झलकती है आम आदमी के मन से इन्साफ
के प्रति संदेह की कालिमा ? क्या लोगों को ऐसे अपराधों
में न्याय मिलता प्रतीत नहीं हो रहा है ? जरा बलात्कार से सम्बन्धित कुछ आंकड़ों पर गौर
करें . दिल्ली महिला आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल ,२०१३
से जुलाई ,२०१४ के मध्य दर्ज २७५३ बलात्कार के मामलों में से
१४६४ केस झूठे साबित हुए . यानि ५३.२० प्रतिशत बलात्कार के इस अवधि में दर्ज हुए
केस झूठे निकले . हरियाणा में जुलाई ,२०१६ से दिसम्बर ,२०१६ के बीच दर्ज बलात्कार के दर्ज ६२२ केसों में से १७० केस झूठे सिद्ध
हुए यानि २७.३ प्रतिशत . यहाँ यह उल्लेखनिय है कि हरियाणा प्रति एक लाख जनसँख्या
के आधार पर रिपोर्टेड गैंग रेप में पहले नंबर पर है . एन सी आर बी की २०१५ की
रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में वर्ष २०१४ में १.९ मामले तथा वर्ष २०१५ में १.६
मामले प्रति लाख औरतों के हिसाब से दर्ज हुए . २०१५ की रिपोर्ट के मुताबिक ही
हरियाणा छेड़खानी के मामले में भी प्रति लाख औरत के हिसाब से २.७ मामलों के साथ देश
में दिल्ली और तेलंगाना के बाद तीसरे नंबर पर रहा है .
आखिर इतने अधिक रेप के मामले झूठे सिद्ध
क्यों हो रहे हैं ? वकील राजेश भारद्वाज के
अनुसार रेप के मामलों में कोर्ट व पुलिस स्टेशन में पीडिता से इस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं
जैसे उसका दोबारा बलात्कार हो रहा हो . पीडिता लोक लाज वश ऐसे प्रश्नों के चक्कर
में ऐसी परेशान हो जाती है कि वह कुछ की कुछ कह जाती है और उसका केस हार जाता है . समाज
में भी बलात्कार पीडिता को हेय दृष्टि से देखा जाता है और उसे ही इस
दुष्कर्म के लिए दोषी मान लिया जाता है तथा उसके चाल चलन पर हमेशा ही संदेह
मंडराता रहता है . अधिकतर लोग पहले ही धारणा बना लेते
हैं कि मामला झूठा ही मिलेगा . हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की यह टिप्पणी
कि अधिकतर बलात्कार के केस झूठे ही होते हैं समाज की प्रतिध्वनि प्रतीत होती है .
हमें इस पूर्व कल्पित धारणा को बदलना होगा तथा महिलाओं को भी इतना सक्षम बनाना
होगा कि वे चंडीगढ़ की आई ए एस अधिकारी की पुत्री वर्णिका कुंडू की तरह अपना बचाव
खुद कर ले अन्यथा समाज के बिगड़ैल विकास यों ही बलात्कार तथा अपहरण हेतु पीछा करते
रहेंगें .
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