सामयिक लेख
चंडीगढ़ से जग मोहन ठाकन
क्या हरियाणा सरकार रोक पायेगी पेपर लीक घोटाले ?
क्या हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में संचालित वर्तमान भाजपा सरकार केवल पेपर लीक सरकार बन कर रह गयी है ? भले ही हरियाणा की भाजपा सरकार ईमानदारी , कुशल प्रशासन तथा भ्रष्टाचार मुक्त हरियाणा के कितने ही दावे करती रहे ,परन्तु आज सरकार द्वारा की जा रही कंडक्टर से लेकर जज तक की भर्ती परीक्षाओं के पेपरों की सरे आम “लीकेज” व बिक्री के मामले सरकार की विफलता के प्रतीक बन कर उसके माथे पर कलंक दाग के रूप में उभरते स्पष्ट नजर आ रहे हैं . और सरकार ना जाने अपनी किस विवशता की खीज में कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है . अगर यों ही भर्ती परीक्षाओं के पेपर बिकते रहे तो कैसे आम बेरोजगार एवं गरीब परिवार का अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में कम्पीट कर पायेगा ? उसके नौकरी पाने के दरवाजे तो हमेशा के लिए अवरुद्ध हो जांयेंगे और केवल और केवल पैसे के बलबूते पर ही नौकरी पाने वाले व्यक्ति ही सफल हो पायेंगे . क्या पैसे के दम पर नौकरी पाने वाले जजों से आम आदमी न्याय की आस कर पायेगा ? फिर तो राम रहीम गुरमीत जैसे लोग कभी भी सजा नहीं पाएंगे . कैसे आगे आयेंगे ईमानदारी , निष्पक्षता एवं दबंगता के प्रतीक न्यायमूर्ति जग दीप सिंह जैसे लोग ? आखिर क्यों नहीं रुक पा रहे विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक घोटाले ? क्या पेपर लीक करने वाले गैंग सरकार के विजिलेंस तंत्र से ज्यादा तीव्र व प्रभावशाली हैं या सरकारी तंत्र की मिलीभगत चौकड़ी सरकार की तथा कानून की कोई परवाह नहीं करती ? क्या उन्हें किसी का कोई भय नहीं है ?
हाल की जज भर्ती परीक्षा (१६ जुलाई ,२०१७ ) के पेपर लीक घोटाले में हाई कोर्ट के ही रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ बलविंदर शर्मा की संदिग्ध भूमिका ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट को भी सोचने को मजबूर कर दिया . हरियाणा सिविल जज भर्ती परीक्षा के पेपर सेट कराने से रिजल्ट निकालने तक का सारा जिम्मा डॉ शर्मा का था तथा २०१५ में पंजाब में जजों की भर्ती भी इन्होने ही करवाई थी . पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की रिक्रूटमेंट कोर्ट क्रिएशन कमेटी ने हरियाणा जज भर्ती परीक्षा को स्क्रैप करने की सिफारिश की थी . कमेटी ने जाँच में पाया कि कुछ परीक्षार्थियों को पेपर से पहले ही प्रश्न पत्र का पता चल गया था . कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि रजिस्ट्रार डॉ बलविंदर कुमार शर्मा ने परीक्षा में एक उम्मीदवार सुनीता के साथ एक साल में ७६० कॉल या मेसेज एक्सचेंज किये . उल्लेखनीय है कि पिंजौर निवासी एक वकील तथा इसी जज परीक्षा में एक उम्मीदवार रही सुमन ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर कोर्ट को बताया था कि हरियाणा जज भर्ती परीक्षा का पेपर डेढ़ करोड़ रुपये में बिक रहा था और इसकी उसे भी सुशीला नाम की एक लड़की के माध्यम से पेशकश की गयी थी , जो उसके साथ एक कोचिंग संस्थान में कोचिंग ले रही थी . सारी डील सुनीता नाम की एक लड़की, जो हाई कोर्ट के ही रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ बलविंदर कुमार शर्मा के संपर्क में थी , द्वारा की जा रही थी जो खुद भी जज परीक्षा की एक उम्मीदवार थी और बाद में वही जनरल केटेगरी की टोपर भी रही .
हाई कोर्ट ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए शुक्रवार , १५ सितम्बर ,२०१७ को चंडीगढ़ पुलिस को आदेश दिया है कि एस आई टी बनाकर केस की जांच करवाई जाये .
हरियाणा में नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं हैं . हरियाणा के ही एक पूर्व मुख्यमंत्री अपने पुत्र के साथ जे बी टी अध्यापक भर्ती मामले में पहले ही जेल में सजा काट रहे हैं .अगर गत दो वर्षों पर दृष्टिपात करें तो पता चलता है कि वर्ष २०१५ में एसआईपीएमटी का पेपर रोहतक से लीक हुआ था . इस पेपर को लगभग २५० लोगों को लीक करवाने की खबरें आई थी और इसमें औसतन २५ लाख रुपये प्रति व्यक्ति की डीलिंग बताई जा रही है . हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा रविवार , १० सितम्बर ,२०१७ को हुई कंडक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में हरियाणा पुलिस ने रोहतक जिले के महम निवासी कपिल तथा सुनारियां खुर्द निवासी धरमेंदर को गिरफ्तार किया है , इनके पास से ७५ परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड मिले बताये जा रहे हैं और पूछताछ में प्रत्येक से पेपर लीक कराने के लिए ६ लाख रुपये में की गयी सौदेबाजी भी सामने आई बताई जा रही है . हरियाणा आबकारी एवं कराधान विभाग में आबकारी निरीक्षक परीक्षा में भी पेपर लीक कराने का मामला सामने आ रहा है . यानी मामला अंतहीन है .
वर्तमान मीडिया खबरों तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी एवं हरियाणा से विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला के आरोपों को अगर सही माना जाए तो खट्टर सरकार की छवि पेपर लीक सरकार की ही बनती जा रही है .१८ सितम्बर , २०१७ को जारी एक बयान में सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि तीन वर्ष बीतने के बाद भी हरियाणा के नौजवान के पास ना रोटी है ना रोजगार . नौकरियों में घालमेल और गोलमाल चरम सीमा पर है व भ्रष्टाचार का बोलबाला है . सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में तेरह पेपर लीक घोटाले हो चुके हैं .
दूसरी तरफ भाजपा के हरियाणा में मीडिया प्रभारी राजीव जैन इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए उलटे आरोप लगाते हैं - “भाजपा सरकार ने चौटाला के इनेलो तथा पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकारों द्वारा नौकरी , परीक्षा व साक्षात्कार की प्रक्रिया में लगे माफिया तंत्र को तोड़ने का काम किया है .आज कांग्रेस माफिया तंत्र टूटने से तकलीफ में है . हर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के तार रोहतक से जुड़े हैं” . उल्लेखनीय है कि रोहतक पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा का गृह क्षेत्र है .
वर्तमान कंडक्टर भर्ती घोटाले पर जैन कहते हैं - “कंडक्टर परीक्षा का मामला पेपर लीक का नहीं है अपितु फर्जी पेपर बेचने तथा एक सेंटर पर नक़ल कराने से जुड़ा है” .
क्या भाजपा के मीडिया प्रभारी जैन का यह स्वीकरना कि मामला फर्जी पेपर बेचने तथा एक सेंटर पर नक़ल कराने का है ,वास्तव में यह नहीं बतला रहा कि भर्ती परीक्षाओं में घाल मेल व घोटाले हो रहे हैं .फर्जी पेपरों का बेचना तो और भी गंभीर मामला है . आज पेपर फर्जी बिके हैं कल फर्जी नियुक्ति पेपर बिकेंगें , परसों फर्जी अधिकारी बनकर लोग सड़कों पर आ जायेंगे . कौन रोकेगा इन्हें ? क्या यह सरकार की नाकामी नहीं दर्शा रही है . क्या यह सरकार की ड्यूटी नहीं है कि प्रान्त में निष्पक्ष व सुचारू ढंग से जन सामान्य की विश्वसनीयता के साथ कर्मचारियों तथा अधिकारियों की भर्ती हों ? किसी भी प्रान्त तथा देश के नागरिक तभी गलत काम करते हैं जब तक उन्हें किसी कड़ी सजा का भय ना हो या सरकार जानबूझकर या अपनी अक्षमता के कारण ऐसे कृत्यों को रोक पाने में नाकामयाब हो .
हालांकि भाजपा सरकार की ही पुलिस हाल की कंडक्टर भर्ती में इसे पेपर लीक का मामला मानती है . पुलिस के अनुसार कंडक्टर भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र धरमेंदर नामक युवक ने परीक्षा दे रहे एक अन्य युवक जींद के कर्मजीत के साथ मिलकर लीक किया था .पुलिस ने धरमेंदर को मौके पर ही दबोचा था और पाया था कि उसके मोबाइल फ़ोन से प्रश्न पत्र व्हाट्स एप द्वारा रोहतक के एक मोबाइल नंबर पर भेजा गया था और रोहतक से धरमेंदर के मोबाइल नंबर पर प्रश्न पत्र के उत्तर भी आने शुरू हो गए थे .
पर क्या हरियाणा की भाजपा सरकार इन पेपर लीक घोटालों को रोक पायेगी ? या पैसे व सत्ता में पहुँच के बल पर गड़बड़ी करने में माहिर लोग सरकारी पदों पर आसीन होते रहेंगे और प्रान्त की प्रतिभाएं हताशा व निराशा के माहौल में दम तोड़ती रहेंगीं ?
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व्यंग्य
जग मोहन ठाकन
मोदी के बयान से भड़की गाय –दूध देना बंद
श्रीमति जी ने जैसे ही दूध दूहने के लिए बछड़े को खूंटे से खोलकर गाय के समीप छोड़ा , गाय ने दुल्लती मार बछड़े को निकट भी नहीं फटकने दिया . जो गाय दूध का समय होते ही बार बार रंभाने लग जाती थी , आज इतनी बेरुखी कैसे हो गयी ? जिस बछड़े को वह चाट चाट कर निहाल हो जाती थी और आँख बंद कर उस पर पूरा ममत्व लुटा देती थी , वो आज अपने ही जाये को लात और सींग मारकर दूर भगा रही है . श्रीमती जी बछड़े को बार बार गाय के नजदीक ले जाने का असफल प्रयास कर रही थी और बछड़ा माँ की नज़र से ही समझ गया था कि आज कोई विशेष गड़बड़ है . वह गाय की तरफ मूंह भी नहीं कर रहा था . हम समझ गए थे कि आज गाय दूध देने के मूड में नहीं है . जरूर कोई खान पान में कमी रही है . परन्तु श्रीमती जी कहती हैं कि नहीं चारा चाट तो बराबर वही दिया है . हमें भी गाय रखते हजारों वर्ष हो गए हैं . सदा से ही हमारे पूर्वज गाय ही रखते आये हैं , इसलिए इतना तो समझ ही गए कि आज गाय माता जरूर किसी बात को लेकर नाराज़ हैं . अब तो गाय में हम इतना रम गए हैं कि उसकी भाषा को भी कुछ कुछ समझने लगे हैं .खैर हम ठहरे पत्रकार बिरादरी से , किस से कब क्या उगलवाना है इतना तो हम सीख ही गए हैं . अलग अलग भाषाओँ के अखबारों और चैनलों के लिए इंटरव्यू कर करके भिन्न भिन्न भाषाओँ के ज्ञाता हो गए हैं . पर पशुत्व की भाषा अभी भी नहीं सीख पाए हैं .
क्या सोच रहे हो?
गाय की धीमी रम्भाहट हमें सुनाई पड़ी . अरे गौ माता तुम हमारे “मन की बात” समझती हो ?
अरे मुझे गौ माता कह कर अपमानित मत करो . हम बेजुबान हैं , तुम्हारी तरह बदजुबान नहीं . क्या कहते हो पशु केवल दूध देते हैं ,वोट नहीं . पी लो दूध ? अच्छा ! तो अब तुम्हें भी लगने लगा है कि पशुओं के पास वोट नहीं हैं . चालीस साल पहले तक गाय बछड़े को आगे करके सदा जीत पाने वाले माँ बेटे ने हमें छोड़ा तो हमने भी उन्हें छोड़ दिया . आज माँ बेटे की दूसरी पीढ़ी आ गयी पर हमें भूलने का खामियाजा अभी भी भुगत रहे हैं . तुमने बड़ी चतुराई से हमें माता का दर्जा देकर विजय श्री पा ली . हम गौवर्गीय पशु अभी भी इतने भोले ही रह गए हैं कि थोड़ा सा प्यार से पुचकारो तुरंत पावस कर दूध देने लगते हैं .हम तुम्हारी “मन की बात” की असली मंशा नहीं समझ पाए . तुम कहते हो पशु वोट नहीं देते ? फिर क्यों पहलु खान मारे जाते हैं हमारे नाम पर ? लगता है हम तुम्हें अब निरे पशु दिखने लगे हैं ,जिनके वोट नहीं होते . पर ध्यान से सुन लो हमारे वोट नहीं हैं ,पर वोट बैंक हैं जो किसी को भी ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर करने का सामर्थ्य रखते हैं . अभी भी सोच लो समय है . हम तो पशु होकर भी दया भाव रखते हैं . छोडो बछड़ा और निकाल लो दूध . हम नहीं देख सकते तुम्हारे बच्चों को बिना दूध के बिलखते हुए .
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